डोईवाला का खंड शिक्षा अधिकारी 100000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ अरेस्ट, इसलिए ले रहा था रिश्वत
Doiwala Block Education Officer arrested red-handed while accepting a bribe of Rs 100,000.

डोईवाला का खंड शिक्षा अधिकारी 100000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ अरेस्ट, इसलिए ले रहा था रिश्वत
डोईवाला/देहरादू, ब्यूरो। विकासखंड डोईवाला के खंड शिक्षा अधिकारी धनवीर बिष्ट को विजिलेंस टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
सूत्रों के अनुसार, यह नेपाली फार्म में किसी निजी विद्यालय की आरटीई के तहत मिलने वाली धनराशि के लिए रिश्वत ले रहे थे।
Doiwala Block Education Officer arrested red-handed while accepting a bribe of Rs 100,000.
थाना सतर्कता सैक्टर देहरादून पर पंजीकृत मु0अ0सं0-7/2026 धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशो0अधि0 2018) बनाम धनवीर सिंह बिष्ट, उपशिक्षा अधिकारी, प्रभारी खण्ड शिक्षा अधिकारी, डोईवाला, जनपद देहरादून में 1.4.2026 को सतर्कता सैक्टर देहरादून की ट्रैप टीम द्वारा अभियुक्त धनवीर सिंह बिष्ट हाल तैनाती उप शिक्षा अधिकारी, प्रभारी खण्ड शिक्षा अधिकारी, डोईवाला, जनपद देहरादून एवं अभियुक्ता पुष्पांजलि निवासी लेन नम्बर 5 डालनवाला देहरादून, हाल स्वामी उत्तरांचल मार्डन स्कूल गुमानीवाला ऋषिकेश, जनपद देहरादून को शिकायतकर्ता से उनके गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल ऋषिकेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत अध्ययनरत छात्रों की प्रतिपूर्ति के बिल के भुगतान के एवज में 1,00,000/- रुपये उत्कोच धनराशि ग्रहण करते हुये रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
*देहरादून में उप शिक्षा अधिकारी की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि साफ संकेत है कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जमीन पर असर दिखा रही है।*
रंगे हाथ गिरफ्तारी — सिस्टम को साफ करने का संदेश
नीति नहीं, नीयत भी साफ
डोईवाला में तैनात उप शिक्षा अधिकारी और उनकी महिला सहयोगी का 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि अब भ्रष्टाचार करने वालों के लिए कोई “सेफ ज़ोन” नहीं बचा है। आरटीई प्रतिपूर्ति जैसे संवेदनशील विषय में भी रिश्वत मांगना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि गरीब बच्चों के अधिकारों पर सीधा हमला है।
धामी सरकार का साफ संदेश— “भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं”
धामी सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि: चाहे अधिकारी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो,चाहे मामला किसी भी विभाग का हो, भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर सीधी कार्रवाई होगी — बिना किसी दबाव या संरक्षण के।
यह कार्रवाई कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से सतर्कता विभाग और अन्य एजेंसियों द्वारा लगातार की जा रही सख्त कार्रवाइयों की कड़ी है।
धामी सरकार की विशेषता सिर्फ नीतियां बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करना है। ट्रैप ऑपरेशन तेज हुए हैं और शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लिया जा रहा है
दोषियों को रंगे हाथ पकड़कर जेल भेजा जा रहा है, यही वजह है कि अब सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ती नजर आ रही है।
जनता का विश्वास मजबूत
ऐसी कार्रवाइयों से आम जनता को यह भरोसा मिल रहा है कि0उनकी शिकायतें अनसुनी नहीं होंगी और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सरकारी योजनाओं का लाभ बिना “रिश्वत” के मिल सकेगा*
देहरादून की यह घटना एक उदाहरण है कि उत्तराखंड में अब “भ्रष्टाचार की कीमत” चुकानी पड़ रही है। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार सिर्फ दावे नहीं कर रही, बल्कि एक साफ और जवाबदेह प्रशासन देने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है।




