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राज्य कर कर्मचारी महासंघ का 2 मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन, जमकर नारेबाजी, किया सचिवालय कूच

State Tax Employees Federation staged a protest over two demands, raising slogans and marching to the Secretariat.

राज्य कर कर्मचारी महासंघ का 2 मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन, जमकर नारेबाजी, किया सचिवालय कूच

देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज सोमवार को संयुक्त कर्मचारी घटकों के बैनर तले राज्य कर कर्मचारी महासंघ ने कनक चौक से सचिवालय के पास तक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और जमकर नालेबाजी की कर्मचारियों का कहना है कि इससे पहले भी वह प्रदर्शन करते रहे हैं जिससे अधिकारियों को उसका फायदा हुआ है लेकिन कर्मचारी को न तो प्रोन्नति दी जा रही है और न ही नए कर्मचारी की भर्ती की जा रही है। स्टेट जीएसटी विभाग में एक कर्मचारी पर सैकड़ों व्यापारियों की जीएसटी रिटर्न बनने का दबाव रहता है।

एक कर्मचारी ढाई सौ से अधिक व्यापारियों की रिटर्न भर रहे हैं। इस मौके पर आयोजित सभा में कर्मचारी संगठन के नेताओं ने कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बाद भी कर्मचारियों के हितों के फैसले नहीं लिए जा रहे हैं।

The State Tax Employees Federation, under the banner of the Joint Employees’ Components, staged a fierce protest and marched to the Secretariat in Dehradun.

फरवरी माह में इस संबंध में अधिकारियों को अल्टीमेटम भी दिया गया था लेकिन फिर भी उनकी दो सूत्रीय मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके कारण उन्हें उग्र होकर सड़कों पर आंदोलन करने को तैयार हैं।

आपको बता दें कि आज (सोमवार) को उत्तराखण्ड राज्य कर मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले सम्पूर्ण प्रदेश के राज्य कर विभाग के कर्मचारियों द्वारा उत्तराखण्ड सचिवालय कूच किया गया। सचिवालय कूच का मुख्य कारण शासन स्तर पर लंबित प्रमुख दो सूत्रीय मांगों पर आतिथि तक शासन व प्रशासन के द्वारा सकारात्मक कार्यवाही न होना था। कर्मचारियों की पहली मांग यह थी कि विभागीय कर्मचारियों के स्ट्रकचर का पुनगर्ठन  व दूसरी मांग राज्य कर अधिकारी नियमावली में संशोधन था सचिवालय कूच कार्यक्रम राज्य कर विभाग के कर्मचारी प्रातः 10ः00 परेड ग्राउड में एकत्र हुये। तत्पश्चात 11ः30 बजे उत्तराखण्ड राज्य कर मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले सचिवालय कूच को प्रस्थान किया। सचिवालय कूच के इस कार्यक्रम में प्रदेश स्तर से सैकड़ों कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। पुलिस प्रशासन के द्वारा कर्मचारियों को पुलिस मुख्यायल के पास बैरगेटिंक लगा कर रोक दिया गया, तत्पश्चात प्रांतीय कार्यकारणी के पदाधिकारियों को वित्त सचिव आई0ए0एस दिलीप जावलकर जी के साथ वार्ता के लिए बुलाया गया। वार्ता हेतु प्रदेश अध्यक्ष श्री जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश महामन्त्री इन्द्रजीत सिंह , वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल  अग्रवाल व संगठन मंत्री सुरेश शर्मा उपस्थित रहें। वार्ता में राज्य कर कर्मचारियों की मांगो पर निम्नप्रकार से सहमती बनी हैः-
1.वार्ता का पहला बिन्दु कर्मचारियों के विभागीय ढ़ाचा पुनर्गठन पर विभागाध्यक्ष आयुक्त कर महोदया के साथ शासन स्तर पर बैठक आयोजित की जायेगी। जिसमें यह निर्णय लिया जाना है कि वर्तमान में कितने पदों की आवश्यता विभाग में है

2. वार्ता का दूसरा बिन्दु राज्य कर अधिकारी की नियमावली में संशोधन का था जिस पर वित्त सचिव द्वारा पूर्णतः सहमति व्यक्त की गई।

उक्त वार्ता के संदर्भ में प्रदेश अध्यक्ष श्री जगमोहन सिंह नेगी जी यह कहना है कि आज की वार्ता में जो आश्वासन वित्त सचिव के द्वारा दिया गया है  यदि ससमय पर पूरी नहीं होती है तो आगे आन्दोलन पुनः बडे़ स्तर पर किया जायेगा।
आज की सचिवालय कूच कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड से प्रदेश अध्यक्ष अरूण पाण्डे, ओमवीर सिंह (सरंक्षक) ठाकुर शेर सिंह, रविन्द्र सिंह चौहान जी, सुरेश चन्द्र डबराल, विकास नेगी  एवं उत्तराखण्ड राज्य कर मिनिस्ट्रिीयल प्रांतीय कार्यकारणी के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, इन्द्रजीत सिंह (महांमत्री), भरत सिंह राणा (संरक्षक)  मनमोहन नेगी( प्रांतीय सलाहकार) विशाल अग्रवाल (विरिष्ठ उपाध्यक्ष) उमेश सिंह बिष्ट (उपाध्यक्ष) रविन्द्र कुमार सैनी (संयुक्त मंत्री) संगठन मंत्री सुरेश शर्मा, सुनील निरजन (प्रवक्ता) सोनू (प्रांतीय मंत्री) सभी प्रांतीय कार्यकारणी के पदाधिकारीगण एवं सभी शाखाओं के पदाधिकारीण जिसमें मुख्यालय शाखाध्यक्ष जसंवत खोलिया एवं शाखामंत्री पिंकेश रावत, देहरादून शाखा अध्यक्षा श्रीमती महिमा कुकरेती एवं शाखामत्री निशा जुयाल, रूद्रपुर शाखा अध्यक्ष संजय उपाध्य एंव शाखामंत्री नितेश जोशी, काशीपुर शाखाध्यक्ष अरेन्द्र चौहान एवं शाखामन्त्री योगेश, हल्द्वानी शाखाध्यक्ष कैलास चन्द्र जोशी एवं शाखंामन्त्री प्रमोद भण्डारी, विकासनगर शाखाध्यक्ष निर्मल नेगी शाखमंत्री, ऋषिकेश शाखाध्यक्ष  पंकज रावत एवं शाखामंत्री आशीष डबराल, हरिद्वार शाखाध्यक्ष अजय कुमार एवं शाखामंत्री देवेन्द्र रावत, बागेश्वर शाखाध्यक्ष राम चन्द्र लोबियाल एवं शाखामंत्री मेहश गिरी गोस्वामी, अल्मोडा शाखाध्यक्ष भुवन बिनवाल एवं शाखामंत्री पपेन्द्र सिंह, पिथोरागड़ शाखाध्यक्ष कोशल जोशी एवं महामंत्री सुरेश पंत, खटीमा शाखाध्यक्ष दीपक सामन्त एवं शाखामंत्री संदीप कुमार रूडकी शाखाध्यक्ष अरूण शर्मा एवं शाखामंत्री प्रतिकार सैनी मुख्यालय शाखाध्यक्ष श्री जसंवत खोलिया एवं शाखामंत्री पिंकेश रावत एवं आदि के नेतृत्व में  प्रदेश के सभी कर्मचारीयों ने प्रतिभाग किया।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड राज्य में कुल राजस्व प्राप्ति में राज्य कर विभाग स्वयं का राजस्व हिस्सा लगभग 50 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद भी राज्य कर विभाग में कर्मचारियों के संरचनात्मक ढ़ाचे को वर्ष 2006-07 के बाद से अभी तक पुनर्गठन नही किया गया व इसके विपरीत राज्य कर विभाग, उत्तराखण्ड अधिकारी संवर्ग का वर्ष 2006-07 तक कुल पद 354 स्वीकृत थे उसके पश्चात अधिकारीक सवंर्ग में दो बार वर्ष 2015-16 में 63 पद सृजित किये गये एवं वर्ष 2024-25 में 16 नये कार्यालय सहित 49 पद सृजित किये गयें थे जबकि विभागीय नियमावली को ताक पर रखते हुये  अधिकारीयों ने अपने पदों को सृजित करवाया। जबकि नियम यह कहता  है कि जब विभागीय  अधिकारीयों का संरचनात्मक ढ़ाचे में वृद्धि होती है तो साथ-साथ में कर्मचारियों के ढाचें में भी वृद्धि होती है यह नियम प्रदेश के अन्य विभागों में लागू है और उतरप्रदेश, हिमाचल, हरियाणा इसी तर्ज पर अधिकारीयों व कर्मचारियों का ढांचा एक साथ स्वीकृत किये जाते है वर्तमान में अधिकारियों के ढाचें में 35 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए, 126 नये पदों स्वीकृत किये गये, जिसके परिप्रेक्ष्य में आज राज्य कर विभाग में अधिकारी संवर्ग में कुल स्वीकृत 481 पद  स्वीकृत हो चुके है। जिसके सापेक्ष वर्तमान में कर्मचारियों की  कुल स्वीकृत पदों की संख्या वर्ष 2006-07 से  मात्र 777 पद ही पर रूकी हुई है।  जिसमें  विगत 20 वर्षों से कोई वृद्धि नहीं हुयी है। वर्तमान में कर्मचारियों के सृजित पदों के सापेक्ष पर विभाग में 61 प्रतिशत अधिकारी स्वीकृत है। जो कि राज्य कर विभाग में सरकारी कार्यालयों के लिये पिरामिड पदानुक्रम संरचना के बिल्कुल विपरीत स्थिति को प्रदर्शित कर रही है।
शाखा मंत्री पिंकेश रावत ने बताया कि सरकार व शासन द्वारा कर्मचारियों के ढांचे के पुनर्गठन पर पक्षपातपूर्ण, संरक्षणवादी रवैया बेहद खेदजनक है। कर्मचारियों का अंतिम बार ढांचा वर्ष 2006 में स्वीकृत हुआ था और विगत 20 वर्षों से अपने संरचनात्मक ढांचे का पुनर्गठन के लिए संघर्षरत है।  जबकि 01 जुलाई 2017 से जी0एस0टी लागू होने से पूर्व विभाग में कुल पंजीकृत व्यापरियों की संख्या लगभग 1 लाख के करीब थी जो कि जीएसटी लागू होने के पश्चात आज लगभग 2 लाख 13 हजार हो गयी है।  जिसमें वर्तमान में व्यापारियों की संख्या में 113 प्रतिशत की वृद्धि हुई, पंजीकृत व्यापारियों की संख्या में वृद्धि के फलस्वरूप राज्य कर  विभाग में कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक दवाब बना हुआ है जिस कारण कार्मिक मानसिक रूप से परेशान हैै। जिस कारण कर्मचारियों की मुख्य मांगों में कर्मचारी ढांचे का पुनर्गठन, राज्य कर अधिकारियों की नयी नियमावली बनाने, के लिए विगत 06 माह से संघर्षरत है।

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