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उत्तराखंड में जुआ-सट्टा खेलने या खिलाने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना, अंग्रेजों के जमाने का ये नियम बदला

Gambling or betting in Uttarakhand is punishable by 5 years in jail and a fine of 10 lakh; this British-era rule has been changed.

उत्तराखंड में जुआ-सट्टा खेलने या खिलाने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना, अंग्रेजों के जमाने का ये नियम बदला

देहरादून, ब्यूरो। शुक्रवार को उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में एक अहम प्रस्ताव पर मुहर लगी है। अब उत्तराखंड में जुआ-सट्टा खेलने या खिलाने पर पांच साल की जेल और दस लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में पांच अहम प्रस्ताव पर मुहर लगी है जिनमें अंग्रेजों के जमाने के इस नियम को भी बदलने पर सहमति बनी है।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ब्रिटिश कालीन सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 को निरस्त करते हुए राज्य का अपना कानून बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। राज्य के अपने उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक-2026 को आगामी बजट सत्र में मंजूरी के लिए विधानसभा में पेश किया जाएगा।

इस विधेयक में कई कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही चार और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। मालूम हो कि वर्तमान में राज्य में लागू 1867 के कानून के मानक वर्तमान समय में व्यावहारिक साबित नहीं हो रहे। जुए के एक बड़ी सामाजिक बुराई होने की वजह से मुख्यमंत्री धामी ने गृह विभाग को सख्त कानून का प्रस्ताव तैयार करने को कहा था।

नया कानून बनेगा, दस लाख रुपये तक जुर्माना.….

सड़क, गली आदि सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने पर तीन माह की साधारण जेल/पांच हजार जुर्माना या दोनों दंड

घर में जुआ खिलवाने पर दो साल की जेल/दस हजार जुर्माना या दोनों दंड

जुआघर चलाने पर पांच साल की जेल/एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों ही सजाएं

सिंडीकेट की तरह सट्टेबाजी, जुए की गतिविधि चलाने पर तीन से पांच साल की जेल या दो से पांच 10 लाख रुपये जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ लागू होंगी।

ये होंगे जुए के अपराध….

सड़क किनारे अथवा किसी भी सार्वजनिक स्थल पर पैसे के लेनदेन से जुड़े खेल मसलन ताश खेलना, पैसे लगाकर पशु-पक्षियों को लड़ाना आदि विभिन्न प्रकार के खेल खेलना, बैटिंग करना, सट्टा लगाना, घर में जुआघर चलाना, गिरोहबंद तरीके से जुए का संचालन।

शुक्रवार को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में जुए व सट्टेबाजी पर रोक लगाने के अलावा निजी विवि की स्थापना समेत अन्य खास फैसलों पर मुहर लगी।

कैबिनेट की बैठक में पांच प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में अल्पसंख्यक आयोग से संबंधित संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, भाषा संस्थान में संशोधन सहित विभिन्न विधायी प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

कैबिनेट ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 को अधिनियमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

इस संशोधन का उद्देश्य राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना है।

संविधान के अनुच्छेद-29 के प्रावधानों के तहत अल्पसंख्यकों के हितों को संरक्षण प्रदान किया गया है। राज्य में मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी और सिख समुदायों के अधिकारों के संरक्षण के लिए वर्ष 2002 में अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया था, जिसमें समय-समय पर संशोधन किए जाते रहे हैं।

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा – शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1993 में संशोधन से जुड़े विधेयक को भी मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य सेवाओं में पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ देने से संबंधित कार्मिक विभाग के 22 मई 2020 के शासनादेश के प्रावधानों को अनुमोदन प्रदान किया गया।

बैठक में उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत राज्य में तीन नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

कैबिनेट ने ब्रिटिश कालीन सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 को निरस्त करते हुए उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026 को अधिनियमित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी।

नए कानून के माध्यम से जुआ, सट्टेबाजी और अवैध द्यूत घरों पर रोक लगाने तथा इसके लिए दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए जाएंगे।

धामी कैबिनेट के प्रमुख फैसले….

– उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी

– पूर्व सैनिकों को आरक्षण से जुड़े प्रावधानों के संशोधन को स्वीकृति

– उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक को मंजूरी

– राज्य में तीन नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का रास्ता साफ

– उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026 को मंजूरी

 

राज्य में प्रस्तावित नए निजी विश्वविद्यालय

माउंट वैली विश्वविद्यालय : जनपद नैनीताल

तुलाज विश्वविद्यालय : जनपद देहरादून

शिवालिक विश्वविद्यालय : जनपद देहरादून

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