आधुनिक कृषि यंत्रों ने बदली किसान बेनी सिंह की तकदीर, रीपर कम बाइन्डर बना अतिरिक्त आय का माध्यम
Modern agricultural machinery has transformed farmer Beni Singh's fortunes; a reaper-cum-binder has become a source of additional income.

आधुनिक कृषि यंत्रों ने बदली किसान बेनी सिंह की तकदीर, रीपर कम बाइन्डर बना अतिरिक्त आय का माध्यम
- रीपर कम बाइन्डर बना अतिरिक्त आय और समय बचत का मजबूत माध्यम
- अब 6-7 दिन का काम मात्र एक दिन में, लागत घटी और मुनाफा बढ़ा
- अपनी खेती के साथ अन्य किसानों को भी मिला लाभ
देहरादून, ब्यूरो। देहरादून के सहसपुर विकासखंड के ग्राम कैचीवाला निवासी प्रगतिशील कृषक बेनी सिंह आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरे हैं। लगभग चालीस बीघा कृषि भूमि पर खेती करने वाले बेनी सिंह ने कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल अपनी खेती को आधुनिक बनाया, बल्कि अतिरिक्त आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
कृषि विभाग द्वारा संचालित “सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन ( SMAM) योजना के अंतर्गत बेनी सिंह को रीपर कम बाइन्डर मशीन पर 2.57 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत उन्हें डीबीडब्ल्यू-187 एवं डीबीडब्ल्यू-327 किस्म का 2 कुंतल उन्नत गेहूँ बीज उपलब्ध कराया गया।
कृषक बेनी सिंह ने विभागीय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्नत बीजों की वैज्ञानिक विधि से बुवाई की, जिसके परिणामस्वरूप गेहूँ की फसल का उत्पादन अत्यंत संतोषजनक रहा। फसल पकने के बाद रीपर कम बाइन्डर मशीन के माध्यम से कटाई कराई गई, जिससे खेती का कार्य पहले की अपेक्षा अधिक सरल, तेज और किफायती हो गया।
उन्होंने बताया कि पहले फसल कटाई के लिए लगभग 1300 रुपये प्रति बीघा खर्च करना पड़ता था तथा पूरी कटाई में 6 से 7 दिन का समय लगता था, जबकि अब मशीन की सहायता से यही कार्य मात्र एक दिन में पूरा हो जाता है। स्वयं के कृषि यंत्र एवं नलकूप सुविधा होने से खेती की लागत में कमी आई है तथा उत्पादन और समय दोनों की बचत हुई है।
रीपर कम बाइन्डर मशीन का उपयोग केवल अपनी खेती तक सीमित न रखते हुए बेनी सिंह ने अन्य किसानों की लगभग 120 बीघा फसल की कटाई भी की। इससे उन्हें 900 रुपये प्रति बीघा की दर से कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
आज कृषक बेनी सिंह आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों को भी यंत्रीकृत खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।





