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टावर की आस में गांव, छत पर चढ़कर करनी पड़ती है बात

डिजिटल इंडिया के दावों के बीच नेटवर्क विहीन हैं नौ गांव

देहरादून। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 4जी सेचुरेशन योजना के बावजूद उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के घाड़ क्षेत्र के कई गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं। वर्ष 2022 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य दूरस्थ और नेटवर्क-विहीन गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाना था, लेकिन चार वर्ष बाद भी क्षेत्र के नौ गांवों में रहने वाले लोगों को संचार सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। घाड़ क्षेत्र के हलजौरा, बेलकी, इनायतपुर, इब्राहिमपुर मसाई कला, गोकुलवाला, डांडा, बनवाला, शाहमंसूर और दौड़बसी गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर नेटवर्क बिल्कुल नहीं आता, जबकि कुछ जगहों पर कमजोर सिग्नल मिलने के कारण लोगों को बातचीत करने के लिए घरों की छतों या ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है। आधुनिक युग में यह स्थिति ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से दूर कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित बीएसएनएल 4जी सेचुरेशन योजना के तहत उन गांवों में मोबाइल टावर स्थापित किए जाने थे जहां अब तक संचार सेवाएं नहीं पहुंच सकी हैं। योजना का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों को हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन सुविधाओं से जोड़ना है, लेकिन घाड़ क्षेत्र के इन गांवों में योजना का अपेक्षित लाभ नहीं पहुंच पाया है। इससे ग्रामीणों में निराशा बढ़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क न होने से सबसे अधिक परेशानी आपातकालीन परिस्थितियों में होती है। दुर्घटना, बीमारी या अन्य संकट की स्थिति में तत्काल किसी से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है। कई बार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने या एंबुलेंस बुलाने में देरी हो जाती है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। मोबाइल संचार सुविधा का अभाव ग्रामीण जीवन की एक गंभीर समस्या बन चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका प्रतिकूल प्रभाव दिखाई दे रहा है। डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन अध्ययन के इस दौर में गांवों के छात्र इंटरनेट कनेक्टिविटी के अभाव में पीछे छूट रहे हैं। ऑनलाइन कक्षाओं, शैक्षणिक सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित जानकारी तक उनकी पहुंच सीमित बनी हुई है। इससे ग्रामीण छात्रों को शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों की तुलना में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने में भी ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आधार, आयुष्मान कार्ड, पेंशन, राशन कार्ड, किसान पोर्टल और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के लिए इंटरनेट आवश्यक हो गया है। नेटवर्क नहीं होने के कारण लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए कई किलोमीटर दूर कस्बों या शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत बढ़ती है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान और अन्य वित्तीय सेवाओं का उपयोग ग्रामीण सुचारु रूप से नहीं कर पा रहे हैं। किसान भी मौसम पूर्वानुमान, फसल बीमा, कृषि योजनाओं और मंडी भाव जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों से समय पर वंचित रह जाते हैं, जिससे उनकी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

हलजौरा गांव के प्रधान स्वामी घनश्याम के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई बार जिला प्रशासन, उपजिलाधिकारी और दूरसंचार विभाग को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। गांव में मोबाइल टावर लगाने की मांग वर्षों से उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र में एक मोबाइल टावर स्थापित कर दिया जाए तो आसपास के कई गांवों की समस्या का समाधान हो सकता है। जानकारी के अनुसार हलजौरा गांव में कोई मोबाइल टावर मौजूद नहीं है, जबकि निकटतम टावर सिकरोढ़ा क्षेत्र में लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित है। दूरी अधिक होने के कारण वहां से मिलने वाला सिग्नल कमजोर पड़ जाता है। दूरसंचार विभाग के अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्र में नया टावर स्थापित होने से नेटवर्क समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

हरिद्वार के जूनियर टेलीकॉम अधिकारी कंचन कांत के अनुसार एक मोबाइल टावर स्थापित करने में लगभग 20 लाख रुपये का खर्च आता है। उन्होंने बताया कि इन गांवों की समस्या का समाधान 4जी सेचुरेशन योजना के तहत होना प्रस्तावित है और इस संबंध में उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अंतिम निर्णय और कार्रवाई उच्च स्तर पर की जानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों की सफलता के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधाएं अत्यंत आवश्यक हैं। जब तक दूरस्थ गांवों को विश्वसनीय संचार सेवाओं से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक डिजिटल समावेशन का लक्ष्य अधूरा रहेगा। घाड़ क्षेत्र के ग्रामीण अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वर्षों पुरानी यह समस्या जल्द दूर होगी और उन्हें भी डिजिटल युग की सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सकेगा।

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