Uttarakhand: SIR में अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा यह ज्ञापन
Uttarakhand: Senior Congress leaders submitted this memorandum to the Chief Electoral Officer regarding irregularities in the SIR.

Uttarakhand: SIR में अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा यह ज्ञापन
देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रथम चरण में सामने आई त्रुटियों और दूसरे चरण में दावों व आपत्तियों की सुनवाई की प्रक्रिया को अव्यावहारिक, अपारदर्शी और पक्षपातपूर्ण बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष, पारदर्शी और मतदाता हितैषी निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग से तत्काल आवश्यक कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन पत्र इस निम्नलिखित है…..
सेवामें,
मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखण्ड, देहरादून
विषयः विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के प्रथम चरण की त्रुटियों एवं द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत दावों एवं आपत्तियों की सुनवाई हेतु अपनाई जा रही अव्यावहारिक एवं पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया के संबंध में कांग्रेस पार्टी की आपत्ति।
प्रिय महोदय,
राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रथम चरण की प्रक्रिया के दौरान अनेक गंभीर त्रुटियां एवं अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रथम चरण में सामने आई इन कमियों एवं त्रुटियों का समुचित परीक्षण एवं निराकरण किए बिना द्वितीय चरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना न केवल मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करेगा, बल्कि संपूर्ण पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाएगा।
कांग्रेस पार्टी राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत दावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के लिए निर्वाचन विभाग द्वारा अपनाई जा रही व्यवस्था के निम्न बिन्दुओं पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज करती है….
1. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत प्राप्त आपत्तियों एवं दावों की सुनवाई के लिए निर्वाचन विभाग द्वारा अनेक स्थानों पर एक ही समय में दो अलग-अलग मतदान केन्द्रों पर एक ही सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) / निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ड्यूटी निर्धारित की गई है जो कि तर्क संगत प्रतीत नहीं होती है।
2. निर्वाचन विभाग द्वारा अपनाई जा रही यह व्यवस्था विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी तरह अव्यावहारिक है। पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, लंबी दूरी, सीमित परिवहन सुविधाओं तथा कठिन आवागमन के कारण किसी भी अधिकारी के लिए एक ही समय अथवा दो घंटे के अंतराल पर दो अलग-अलग स्थानों पर उपस्थित होकर सुनवाई करना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। इससे सुनवाई प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ-साथ मतदाताओं को अनावश्यक असुविधा का सामना करना पड़ेगा तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन होने की आशंका है।
3. यदि निर्धारित समय पर अधिकारी किसी एक मतदान केन्द्र पर उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तो संबंधित गतदाताओं के दावे एवं आपत्तियों के निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण का अधिकार प्रभावित होगा। इससे निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।








