IIT रुड़की ने कपड़ा मंत्रालय में ‘संचय’ – एक राष्ट्रीय शिल्प आधारित संसाधन केंद्र की स्थापना की घोषणा की

IIT रुड़की ने कपड़ा मंत्रालय में ‘संचय’ – एक राष्ट्रीय शिल्प आधारित संसाधन केंद्र की स्थापना की घोषणा की
देहरादून/रुड़की, ब्यूरो। विगत बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के अंतर्गत ‘संचय’ – एक शिल्प आधारित संसाधन केंद्र (क्राफ्ट बेस्ड रिसोर्स सेंटर – CBRC) की स्थापना की स्वीकृति की घोषणा की है। यह केंद्र आईआईटी रुड़की के ऐतिहासिक परिसर में स्थापित किया जाएगा, जो भारत की शिल्प विरासत को प्रौद्योगिकी, डिज़ाइन एवं समकालीन नवाचार के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संसाधन केंद्र को विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के माध्यम से वस्त्र मंत्रालय द्वारा समर्थित किया गया है।
संचय (सेफगार्डिंग, अक्यूमुलेटिंग, नर्चरिंग क्राफ्ट एंड हैरिटेज टू स्टिमुलेट आत्मनिर्भर एंड योग्यता) को भारत की विविध शिल्प परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। प्रारंभिक रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड पर केंद्रित यह केंद्र पारंपरिक एवं संकटग्रस्त शिल्पों के पुनरुद्धार तथा शिल्पकार समुदायों के सशक्तिकरण हेतु संरचित प्रशिक्षण, डिज़ाइन विकास, डिजिटल प्रलेखन और आधुनिक तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा, “संचय भारत की समृद्ध शिल्प विरासत को आधुनिक विज्ञान, डिज़ाइन एवं प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत करने की दिशा में आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह केंद्र नवाचार-आधारित शिल्प पुनरुद्धार और सामुदायिक सशक्तिकरण के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल प्रस्तुत करेगा, जिससे भारत की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था और रचनात्मक क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व सुदृढ़ होगा।”
कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने कहा, “संचय शिल्प संरक्षण एवं नवाचार के लिए एक दूरदर्शी मॉडल प्रस्तुत करता है। आईआईटी रुड़की के साथ साझेदारी के माध्यम से हम पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को सशक्त करने, शिल्प समुदायों का समर्थन करने तथा प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को एकीकृत करने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे भारतीय शिल्पों की दृश्यता, स्थिरता और वैश्विक पहुंच बढ़े। यह सहयोग शिल्पकारों को सशक्त बनाने और भारत की सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की ओर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
संचय, विरासत, नवाचार और सतत विकास के संगम पर आईआईटी रुड़की को स्थापित करता है, जिससे डिज़ाइन, अभियांत्रिकी, सामाजिक विज्ञान और उद्यमिता के क्षेत्रों में बहु-विषयक सहयोग संभव होगा। यह केंद्र शिल्प संरक्षण, कौशल विकास और सांस्कृतिक नवाचार के लिए एक लाइटहाउस संस्थान बनने की दिशा में अग्रसर है—जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक रचनात्मक संवादों में सार्थक योगदान देगा।



